August 20, 2026

मेरे जीवन में हनुमानजी

 विश्वास, साहस और कर्म की मेरी अपनी यात्रा

“असफलता ही सफलता की सीढ़ी है।”

मेरे जीवन में यह केवल एक motivational quote नहीं रहा। यह एक ऐसी सीख है जिसे मैंने बहुत कम उम्र में सुना, जीवन में कई बार गिरकर समझा और समय के साथ अपने भीतर उतारा।

और अगर आज मैं पीछे मुड़कर देखता हूँ, तो मुझे लगता है कि इस पूरी यात्रा में एक शक्ति लगातार मेरे साथ रही है—हनुमानजी

मेरे लिए हनुमानजी केवल एक आराध्य देव नहीं हैं।

वे मेरे लिए साहस हैं।
वे अनुशासन हैं।
वे आत्मविश्वास हैं।
वे सेवा हैं।
वे बुद्धि और विवेक हैं।
वे संकट में स्थिर रहने की शक्ति हैं।
और सबसे बढ़कर—वे मुझे कर्म करते रहने की प्रेरणा देते हैं।

मेरे जीवन में हनुमानजी के साथ मेरा संबंध किसी एक दिन या किसी एक घटना से शुरू नहीं हुआ। इसकी शुरुआत तब हुई जब मैं लगभग 12–14 वर्ष का था।

उस समय मुझे सौभाग्य मिला कि मैं अपने गुरुजी के सान्निध्य में रहा। वे हमारे घर के पास भुज में एक मंदिर में रहते थे। मेरे जीवन में उस उम्र में शायद मुझे यह समझ भी नहीं थी कि किसी गुरु का मार्गदर्शन भविष्य में कितना गहरा असर डाल सकता है।

लेकिन आज पीछे मुड़कर देखता हूँ तो समझ आता है कि गुरुजी ने मेरे भीतर कुछ ऐसे बीज बो दिए थे, जिनका अर्थ मुझे वर्षों बाद समझ में आया।

जब भी मैं उनके पास जाता, कुछ माँगता, किसी समस्या की बात करता या जीवन में कुछ पाने की इच्छा व्यक्त करता, उनका एक बहुत सरल उत्तर होता था—

“हनुमान चालीसा करो।”

उस समय मुझे लगता था कि यह हर समस्या का एक ही समाधान क्यों है? आज समझ आता है कि गुरुजी मुझे समस्या से भागना नहीं सिखा रहे थे। वे मुझे समस्या का सामना करने की शक्ति पैदा करना सिखा रहे थे।

1. गुरुजी ने मुझे हनुमानजी की ओर भेजा

बचपन में हमारी समस्याएँ छोटी होती हैं। पढ़ाई, परीक्षा, दोस्ती, परिवार, भविष्य—इन सबको हम बहुत बड़ा समझते हैं। लेकिन जैसे-जैसे जीवन आगे बढ़ता है, समस्याओं का आकार बदलता जाता है। कुछ समस्याएँ ऐसी आती हैं जिनका कोई आसान उत्तर नहीं होता। कुछ परिस्थितियाँ ऐसी होती हैं जहाँ आपके पास पूरा control नहीं होता। और कुछ moments ऐसे आते हैं जहाँ आपको केवल एक चीज तय करनी होती है—

क्या मैं डरकर पीछे हटूँगा या खड़ा रहूँगा?

मेरे जीवन में शायद यही वह जगह है जहाँ हनुमानजी की भूमिका मेरे लिए और गहरी होती गई। हनुमानजी की सबसे बड़ी विशेषता मुझे हमेशा यह लगती है कि वे केवल शक्तिशाली नहीं हैं। वे शक्ति के साथ विवेक रखते हैं। 

वे केवल वीर नहीं हैं। वे विनम्र वीर हैं। 

वे केवल बुद्धिमान नहीं हैं। वे अपनी बुद्धि का उपयोग रामकाज के लिए करते हैं। 

वे केवल भक्त नहीं हैं। उनकी भक्ति उन्हें कर्म से जोड़ती है।

यही combination मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

भक्ति + बुद्धि + शक्ति + कर्म + विनम्रता।

अगर इनमें से कोई एक भी गायब हो जाए, तो व्यक्तित्व अधूरा हो सकता है।

2. मेरे जीवन की पहली बड़ी सीख — असफलता अंत नहीं है

लगभग 18 वर्ष की उम्र में मेरे जीवन में एक ऐसा समय आया जब मैं 12वीं कक्षा में असफल हुआ। उस उम्र में असफल होना मेरे लिए बहुत बड़ी बात थी। आज पीछे देखता हूँ तो लगता है कि वह failure मेरे जीवन की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक था। क्योंकि उस समय मेरे सामने दो रास्ते थे। या तो मैं अपनी असफलता को अपनी पहचान बना लेता। या फिर उसे अपनी कहानी का एक chapter मानकर आगे बढ़ता।

मेरे गुरुजी ने मुझे वापस खड़ा होने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा—

“असफलता ही सफलता की सीढ़ी है।”

उस समय शायद मैं इस वाक्य का पूरा अर्थ नहीं समझता था।

आज भी मैं इसे पूरी तरह समाप्त सत्य की तरह नहीं, बल्कि एक ऐसी सीख की तरह देखता हूँ जिसे जीवन बार-बार समझाता है। हर failure सफलता की गारंटी नहीं देता। लेकिन failure से सीखकर फिर खड़े होने की क्षमता—वही व्यक्ति को मजबूत बनाती है।

और शायद यही हनुमानजी की सबसे बड़ी शिक्षा है—
गिरना महत्वपूर्ण नहीं है। गिरने के बाद अपनी शक्ति को पहचानना महत्वपूर्ण है।

3. जामवंत और हनुमान — मेरे लिए एक गहरी उपमा

रामायण का एक प्रसंग मुझे जीवन के हर कठिन समय में बहुत गहराई से प्रभावित करता है। समुद्र के सामने हनुमानजी खड़े हैं। कार्य बहुत बड़ा है। लक्ष्य लगभग असंभव दिखाई देता है। और उस समय जामवंत उन्हें उनकी शक्ति का स्मरण कराते हैं। 

मुझे इस प्रसंग में एक बहुत बड़ा management और leadership lesson दिखाई देता है।

कभी-कभी समस्या बड़ी नहीं होती। हम अपनी शक्ति भूल जाते हैं। कभी-कभी हमें नई शक्ति की जरूरत नहीं होती। हमें सिर्फ यह याद दिलाने वाले व्यक्ति की जरूरत होती है कि—

“तुम्हारे भीतर शक्ति है।”

मेरे लिए मेरे गुरुजी ने शायद यही भूमिका निभाई। उन्होंने मेरे भीतर कोई नई शक्ति पैदा नहीं की। उन्होंने मुझे मेरी अपनी शक्ति की ओर देखने की आदत दी।

और शायद यही एक सच्चे गुरु की सबसे बड़ी भूमिका होती है।

4. मेरी जिंदगी का एक छोटा-सा “trick”

समय के साथ मेरे जीवन में एक बहुत व्यक्तिगत तरीका विकसित हुआ। मैं इसे कोई चमत्कारी formula नहीं कहता। मैं इसे अपनी आस्था और अनुशासन की personal practice कहता हूँ। जब समस्या सामान्य होती है, तो मैं सामान्य रूप से काम करता हूँ।

सोचता हूँ।
Planning करता हूँ।
लोगों से बात करता हूँ।
Strategy बनाता हूँ।
और फिर पूरी ऊर्जा से काम करता हूँ।

लेकिन जब मुझे लगता है कि समस्या मेरी सामान्य क्षमता से बहुत बड़ी है—जब परिस्थिति बहुत challenging हो जाती है—तब मेरा एक अलग सहारा होता है।

40 दिन का अनुष्ठान।

मेरे गुरुजी ने मुझे एक साधना बताई थी— 40 दिनों तक प्रतिदिन 11 बार हनुमान चालीसा का पाठ। मेरे लिए यह केवल पूजा नहीं रही। 

यह एक discipline बन गया।
एक mental reset बन गया।
एक commitment बन गया।

और सबसे महत्वपूर्ण—यह मेरे लिए अपने भीतर की ऊर्जा को एक दिशा देने का माध्यम बन गया।

मैं यह दावा नहीं करता कि 40 दिन का अनुष्ठान हर व्यक्ति के लिए हर समस्या का निश्चित समाधान है। लेकिन मैं पूरी ईमानदारी से कह सकता हूँ कि मेरे जीवन में इस साधना का प्रभाव बहुत गहरा रहा है।

5. समस्या बड़ी हो तो मैं समस्या पर नहीं, अपने कर्म पर ध्यान देता हूँ

मेरे professional जीवन में मैंने बहुत challenging situations और contexts में काम किया है। ऐसे समय आए जब परिस्थितियाँ आसान नहीं थीं।

Pressure था।
Uncertainty थी।
Expectations बहुत थीं।

कई बार ऐसा भी लगा कि जो काम सामने है, वह मेरी वर्तमान क्षमता से बहुत बड़ा है। लेकिन मेरे भीतर एक चीज धीरे-धीरे मजबूत होती गई—

मुझे failure का डर कम होता गया।

यह इसलिए नहीं कि मुझे लगता था कि मैं हर बार सफल हो जाऊँगा। बल्कि इसलिए कि मेरा विश्वास परिणाम से थोड़ा हटकर कर्म पर टिक गया। मैंने अपने जीवन में एक बात महसूस की है:

जब आपका मन लगातार यह सोचता रहता है कि “अगर मैं असफल हो गया तो?” तब आपकी बहुत सारी ऊर्जा परिणाम की चिंता में चली जाती है। लेकिन जब आप मन से कहते हैं—

“मेरा काम पूरी ईमानदारी से अपना कर्म करना है। परिणाम हनुमानजी पर छोड़ता हूँ।”

तो वही ऊर्जा वापस काम में लगने लगती है। यही मेरे लिए भक्ति का practical रूप है।

6. हनुमानजी ने मुझे failure से ज्यादा महत्वपूर्ण चीज सिखाई — fearlessness

मैं यह नहीं कहता कि मुझे कभी डर नहीं लगा। इंसान हूँ, इसलिए डर स्वाभाविक है। लेकिन professional life में मैंने एक फर्क महसूस किया है— डर का होना और डर के कारण रुक जाना—दो अलग बातें हैं।

हनुमानजी की ओर देखने से मुझे यह साहस मिला कि डर हो सकता है, uncertainty हो सकती है, लेकिन action रुकना नहीं चाहिए। कठिन परिस्थिति में मेरा मन अक्सर एक बात कहता है—

“काम बड़ा है तो शक्ति भी जगानी पड़ेगी।”

और यहीं से मेरे लिए हनुमानजी केवल मंदिर की मूर्ति नहीं रहते। वे मेरे लिए एक psychological anchor बन जाते हैं। एक ऐसी आंतरिक शक्ति जिसके कारण मैं अपने सामने खड़ी परिस्थिति को देखकर कह सकता हूँ— “ठीक है। देखते हैं। अब अपना पूरा प्रयास करते हैं।”

7. हनुमानजी और Professional Life

आज की corporate और professional दुनिया में हम अक्सर कुछ शब्द सुनते हैं—

Leadership.
Resilience.
Execution.
Ownership.
Courage.
Focus.
Energy.
Adaptability.

अगर मैं इन शब्दों को हनुमानजी के चरित्र के संदर्भ में देखता हूँ, तो मुझे आश्चर्य होता है कि आधुनिक leadership की बहुत-सी बातें हमारे प्राचीन आदर्शों में कितनी गहराई से दिखाई देती हैं।

Leadership

हनुमानजी को नेतृत्व पद की जरूरत नहीं थी। उन्हें किसी designation की जरूरत नहीं थी। जहाँ आवश्यकता हुई, वहाँ उन्होंने नेतृत्व किया। जहाँ किसी और को आगे आना था, वहाँ पीछे रहे।

यह leadership का एक महत्वपूर्ण lesson है— Leadership हमेशा आगे खड़े होने का नाम नहीं है। Leadership सही समय पर सही भूमिका निभाने का नाम है।

Ownership

रामकाज मिला तो यह नहीं पूछा— “यह संभव है या नहीं?” उन्होंने पूछा—“यह करना क्या है?” फिर उन्होंने अपनी पूरी क्षमता लगा दी।

Professional life में ownership का यही अर्थ है। Problem आपकी है तो excuse ढूँढ़ने से पहले solution ढूँढ़िए।

Focus

लंका पहुँचना हो, संजीवनी लानी हो या समुद्र पार करना हो—कार्य बदलते रहे, लेकिन mission से उनका ध्यान नहीं हटा। आज की दुनिया में distraction हमारी सबसे बड़ी समस्याओं में से एक है। हमारे पास information बहुत है। लेकिन focus कम है।

हनुमानजी मुझे सिखाते हैं— शक्ति का मूल्य तभी है जब वह focused हो।

8. “बुद्धिहीन तनु जानिके...” — विकास की शुरुआत अपनी सीमा स्वीकार करने से

हनुमान चालीसा की शुरुआत की पंक्तियाँ मेरे लिए बहुत गहरी हैं:

“बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।
बल बुद्धि विद्या देहु मोहि, हरहु कलेस विकार॥”

इन पंक्तियों में मुझे personality development का एक बहुत सुंदर दर्शन दिखाई देता है। पहले व्यक्ति स्वीकार करता है— “मुझमें सीमाएँ हैं।” फिर वह प्रार्थना करता है— “मुझे बल दो। बुद्धि दो। विद्या दो।” यानी development की शुरुआत ego से नहीं होती। Self-awareness से होती है।

आज हम कहते हैं—

Strength development
Emotional intelligence
Continuous learning
Mental resilience
Self-awareness
Leadership development

मेरे लिए इन सबका आध्यात्मिक रूप इसी भावना में दिखाई देता है।

अपनी सीमाओं को पहचानो।
सहायता माँगने में संकोच मत करो।
सीखते रहो।
अपनी शक्ति विकसित करो।
और फिर उस शक्ति का उपयोग सही दिशा में करो।

9. शक्ति का अर्थ केवल ताकत नहीं है

हम हनुमानजी की कल्पना करते हैं तो सबसे पहले उनका विराट शरीर, गदा और अपार शक्ति दिखाई देती है।

लेकिन मेरे लिए उनकी सबसे बड़ी शक्ति उनका शरीर नहीं है। उनकी सबसे बड़ी शक्ति है— शक्ति पर नियंत्रण। शक्ति होना आसान नहीं। शक्ति का सही उपयोग करना उससे कठिन है। और शक्ति होने के बावजूद विनम्र रहना उससे भी कठिन है।

हनुमानजी हमें यह संतुलन सिखाते हैं।

Strong बनो, लेकिन arrogant मत बनो।
Intelligent बनो, लेकिन egoistic मत बनो।
Successful बनो, लेकिन अपनी सफलता का मालिक मत बन बैठो।
Powerful बनो, लेकिन power का उपयोग सेवा के लिए करो।

यह आज के professional और personal life दोनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

10. “कुमति निवार, सुमति के संगी”

हनुमान चालीसा की यह पंक्ति भी मेरे लिए बहुत meaningful है—

“कुमति निवार सुमति के संगी।”

आज की दुनिया में हमारी सबसे बड़ी लड़ाइयाँ हमेशा बाहर नहीं होतीं। कई बार सबसे बड़ी लड़ाई हमारे अपने मन में होती है।

Negative thinking.
Self-doubt.
Fear.
Overthinking.
Anger.
Ego.
Comparison.
Jealousy.
Failure का डर।
और कभी-कभी success का ego।

मेरे लिए हनुमानजी की उपासना का अर्थ केवल बाहरी संकट दूर करने की प्रार्थना करना नहीं है। यह अपने भीतर की कुमति को पहचानने और सुमति विकसित करने की प्रक्रिया भी है।

यानी— “हे हनुमानजी, केवल मेरी परिस्थिति मत बदलो। मेरी दृष्टि बदलो ताकि मैं परिस्थिति का सही सामना कर सकूँ।”

यह मेरे लिए बहुत बड़ा अंतर है।

11. मेरी सबसे बड़ी सीख: समस्या हटाने की जगह समस्या से लड़ने की शक्ति माँगना

मेरी प्रार्थना भी समय के साथ बदली है।

पहले शायद मन कहता था— “हनुमानजी, मेरी समस्या दूर कर दो।”

आज मन कहता है— “हनुमानजी, मुझे इतनी शक्ति दो कि मैं इस समस्या का सामना कर सकूँ।”

पहले मैं चाहता था कि रास्ता आसान हो जाए। आज मैं चाहता हूँ कि मैं इतना मजबूत हो जाऊँ कि कठिन रास्ते पर भी चल सकूँ।

पहले मैं परिणाम माँगता था। आज मैं अपने कर्म के लिए ऊर्जा माँगता हूँ।

पहले मैं चाहता था कि संकट न आए। आज मैं कहता हूँ—“संकट आए तो मुझे विचलित मत होने देना।”

शायद यही मेरे आध्यात्मिक विकास का सबसे बड़ा संकेत है।

12. 40 दिन का अनुष्ठान — मेरे लिए इसका वास्तविक अर्थ

मेरे लिए 40 दिन का अनुष्ठान केवल 40 दिनों तक हनुमान चालीसा पढ़ना नहीं है।

यह चार चीजों की practice है:
1. Discipline : मन करे या न करे—करना है। यही discipline professional life में भी चाहिए।
2. Focus : एक समय में एक उद्देश्य। एक दिशा में ऊर्जा।
3. Faith : जब परिणाम दिखाई नहीं दे रहा हो तब भी प्रयास जारी रखना।
4. Surrender : अपना सर्वश्रेष्ठ देने के बाद परिणाम को स्वीकार करना।

यही कारण है कि जब कोई बहुत बड़ी चुनौती सामने आती है, तो मेरे भीतर एक अलग तरह की energy आती है।

मैं यह सोचकर काम नहीं करता कि— “मैं निश्चित रूप से जीतूँगा।”

मैं इस विश्वास के साथ काम करता हूँ कि—“मैं अपनी पूरी शक्ति लगा सकता हूँ।”

और मेरे लिए यही बहुत बड़ी बात है।

13. भक्ति और कर्म — दोनों साथ क्यों जरूरी हैं?

भगवद्गीता में श्रीकृष्ण अर्जुन को कर्म के मार्ग की ओर ले जाते हैं। कर्मयोग का मूल संदेश यह है कि मनुष्य अपने कर्तव्य और कर्म पर ध्यान दे, फल की आसक्ति से स्वयं को बाँधे नहीं। 

मेरे लिए हनुमानजी इसी दर्शन का जीवंत उदाहरण हैं।

वे केवल राम का नाम नहीं लेते। वे राम का काम करते हैं।

यही अंतर बहुत महत्वपूर्ण है।

भक्ति अगर कर्म से अलग हो जाए तो वह केवल भावना बन सकती है। और कर्म अगर किसी उच्च उद्देश्य से अलग हो जाए तो वह केवल achievement बन सकता है।

लेकिन—
भक्ति + कर्म = सेवा।

और शायद यही हनुमानजी की सबसे बड़ी प्रेरणा है।

14. Professional success के पीछे एक invisible force

मेरे professional जीवन में मैंने कई बार देखा है कि बाहर से लोग केवल परिणाम देखते हैं।

Project सफल हुआ।
Problem solve हुई।
Target achieve हुआ।
Difficult situation handle हुई।
Leadership दिखाई दी।

लेकिन उस परिणाम के पीछे बहुत कुछ invisible होता है।

रातों की चिंता।
अनिश्चितता।
गलतियाँ।
असफल प्रयास।
दूसरों की expectations।
अपनी limitations।

और इन सबके बीच लगातार काम करते रहने की मानसिक शक्ति। मेरे लिए इस invisible force का एक बड़ा हिस्सा हनुमानजी में मेरा विश्वास रहा है। मैं यह नहीं कहता कि हर सफलता का श्रेय केवल मेरी साधना को दिया जा सकता है।

मैंने मेहनत की। लोगों ने साथ दिया। टीम ने काम किया। समय और परिस्थितियों ने भूमिका निभाई। मेरी अपनी गलतियों और सीखों ने मुझे बदला।

लेकिन इन सबके बीच एक आंतरिक विश्वास था—“मैं अकेला नहीं हूँ।”

और यह भावना कई बार बहुत बड़ी शक्ति बन जाती है।

15. मेरे लिए Hanumanji का अर्थ है — Energy to Execute

अगर मुझे एक वाक्य में बताना हो कि हनुमानजी ने मेरे professional जीवन में मुझे क्या दिया, तो मैं शायद कहूँगा— उन्होंने मुझे execution की energy दी।

Problem को देखकर freeze नहीं होना। Problem को देखकर plan बनाना।

Plan को action में बदलना। Action में consistency रखना। और अंत तक लगे रहना।

कई बार हमें knowledge की कमी नहीं होती। हमें action की energy की कमी होती है। हमें पता होता है कि क्या करना है, लेकिन हम करते नहीं हैं।

हनुमानजी मुझे यही याद दिलाते हैं— ज्ञान को कर्म में बदलो।

16. आज के युवाओं के लिए मेरी बात

आज की generation के सामने opportunities बहुत हैं। लेकिन challenges भी उतने ही हैं। Social media comparison है। Career uncertainty है। Failure का pressure है। Instant success की expectation है। Mental distraction है। और सबसे बड़ी बात—हम चाहते हैं कि सब कुछ जल्दी हो।

लेकिन प्रकृति जल्दी नहीं चलती।
व्यक्तित्व भी जल्दी नहीं बनता।
विश्वास भी जल्दी नहीं बनता।
और सफलता भी हमेशा जल्दी नहीं आती।

मेरी अपनी यात्रा मुझे एक सरल बात सिखाती है—
अपनी शक्ति को पहचानो।
अपना discipline बनाओ।
एक उद्देश्य चुनो।
पूरी मेहनत करो।
गिरो तो वापस उठो।
और अपने से बड़ी किसी शक्ति पर विश्वास रखना सीखो।

आप इसे हनुमानजी कहें, ईश्वर कहें, अपने गुरु की कृपा कहें या अपनी अंतरात्मा की शक्ति—नाम अलग हो सकता है। लेकिन मनुष्य को अपने भीतर एक ऐसा आधार चाहिए जो कठिन समय में उसे टूटने न दे।

17. मेरे दस Hanuman Sutras

आज अगर मैं अपनी पूरी जीवन-यात्रा से हनुमानजी की दस शिक्षाएँ निकालूँ, तो वे मेरे लिए ये होंगी:

  1. डर को स्वीकार करो, लेकिन डर के कारण रुक मत जाओ।
  2. अपनी शक्ति को पहचानो—और जब भूल जाओ तो ऐसे लोगों को अपने जीवन में रखो जो आपको आपकी शक्ति याद दिलाएँ।
  3. Failure को identity मत बनाओ। उसे feedback बनाओ।
  4. Knowledge को action में बदलो।
  5. Strength के साथ humility रखो।
  6. अपने मन की कुमति से भी उतनी ही लड़ाई करो जितनी बाहरी समस्याओं से।
  7. Discipline को motivation से ऊपर रखो।
  8. जब समस्या बड़ी हो जाए, तो अपनी साधना और अपना focus दोनों बढ़ाओ।
  9. अपना सर्वश्रेष्ठ कर्म करो और परिणाम को स्वीकार करना सीखो।
  10. सफलता को केवल अपने लिए मत देखो—अपनी शक्ति को सेवा में लगाओ।
18. आज मेरी हनुमान भक्ति क्या है?

आज मेरे लिए हनुमानजी की भक्ति केवल पूजा या पाठ तक सीमित नहीं है।

जब मैं किसी कठिन situation में शांत रहता हूँ—वह भी मेरे लिए भक्ति है।
जब मैं डर के बावजूद action लेता हूँ—वह भी भक्ति है।
जब मैं अपनी पूरी energy किसी जिम्मेदारी में लगाता हूँ—वह भी भक्ति है।
जब मैं किसी व्यक्ति की मदद करता हूँ—वह भी भक्ति है।
जब मैं अपने ego को पीछे रखकर team को आगे बढ़ाता हूँ—वह भी भक्ति है।
जब मैं असफल होने के बाद फिर खड़ा होता हूँ—वह भी भक्ति है।
और जब मैं अपनी पूरी क्षमता से काम करने के बाद कहता हूँ—

“अब परिणाम आपके हाथ में है।”

तब शायद वह मेरी सबसे सच्ची भक्ति होती है।

19. गुरुजी की वह सीख आज भी मेरे साथ है

कभी-कभी मैं सोचता हूँ कि अगर उस उम्र में मेरे गुरुजी मुझे बार-बार यह न कहते कि—“हनुमान चालीसा करो।” तो शायद मेरे जीवन में हनुमानजी का अर्थ इतना गहरा नहीं होता। उन्होंने मुझे कोई complicated philosophy नहीं दी।

उन्होंने मुझे एक सरल practice दी। और उस practice के पीछे एक बहुत बड़ी philosophy छिपी थी—

मन को स्थिर करो।
विश्वास जगाओ।
अपनी शक्ति पहचानो।
और फिर कर्म करो।

आज professional life के वर्षों बाद मुझे लगता है कि गुरुजी की वह छोटी-सी सलाह मेरे लिए एक lifelong operating system बन गई।

Problem आई— हनुमानजी।
Fear आया— हनुमानजी।
Failure आया— हनुमानजी।
बहुत बड़ा लक्ष्य आया— हनुमानजी।

और फिर— काम पर लग जाओ।

20. मेरी यात्रा अभी पूरी नहीं हुई है

मैं यह लेख किसी अंतिम निष्कर्ष के रूप में नहीं लिख रहा। क्योंकि मेरी यात्रा अभी जारी है। आज भी समस्याएँ आती हैं। आज भी uncertainty आती है। आज भी कई बार मन विचलित होता है।

लेकिन फर्क इतना है कि अब मेरे पास एक आधार है। मुझे पता है कि जब परिस्थिति मेरी सामान्य क्षमता से बड़ी लगे, तो मुझे अपने भीतर की ऊर्जा को फिर से व्यवस्थित करना है।

मुझे अपनी साधना करनी है।
मुझे अपने कर्म पर लौटना है।
और मुझे अपने आराध्य पर विश्वास रखना है।

यही मेरे लिए हनुमानजी हैं।

सिर्फ संकटमोचन नहीं। संकट में मुझे स्वयं को पहचानने की शक्ति देने वाले।

सिर्फ बल के प्रतीक नहीं। बल के सही उपयोग की शिक्षा देने वाले।

सिर्फ भक्त नहीं। भक्ति को कर्म में बदलने वाले।

सिर्फ राम के सेवक नहीं। सेवा को जीवन का उद्देश्य बनाने वाले।

अंत में — मेरा हनुमान मंत्र
अगर कोई मुझसे पूछे कि मेरे जीवन में हनुमानजी ने क्या बदला? तो मेरा उत्तर शायद बहुत सरल होगा। उन्होंने मेरी समस्याएँ हमेशा नहीं बदलीं। लेकिन उन्होंने मुझे समस्याओं को देखने का मेरा तरीका बदलने में मदद की।

उन्होंने मुझे यह विश्वास दिया कि— समस्या बड़ी हो सकती है, लेकिन मैं उससे छोटा नहीं हूँ। और जब समस्या बहुत बड़ी हो— तो मैं भागूँगा नहीं। मैं घबराऊँगा नहीं। मैं परिणाम की चिंता में अपनी ऊर्जा बर्बाद नहीं करूँगा। मैं अपनी साधना करूँगा। अपने मन को स्थिर करूँगा। अपनी पूरी शक्ति जुटाऊँगा। और फिर— काम पर लग जाऊँगा।

शायद यही मेरी जिंदगी में हनुमानजी की सबसे बड़ी सीख है।
भक्ति करो।
बुद्धि माँगो।
शक्ति जगाओ।
अनुशासन रखो।
कर्म करो।
सेवा करो।
और फिर परिणाम को उस शक्ति पर छोड़ दो जिस पर तुम्हारा विश्वास है।

मेरे लिए हनुमानजी का अर्थ यही है—

Fearlessness without arrogance.
Strength without ego.
Intelligence without pride.
Action without attachment.
And devotion without conditions.

आज भी जब जीवन मुझे कोई बहुत बड़ी चुनौती देता है, मेरे भीतर कहीं से वही पुरानी आवाज आती है—“हनुमान चालीसा करो।”

और उसके बाद एक और आवाज आती है— “अब उठो। काम करो। अपना सर्वश्रेष्ठ दो। बाकी हनुमानजी पर छोड़ दो।”

यही मेरी यात्रा है।
यही मेरा विश्वास है।

और शायद यही मेरी जिंदगी का सबसे बड़ा Hanuman Mantra है।

॥ श्री हनुमते नमः ॥

1 comment:

  1. Excellent 👌 well narrated! जय हनुमान ज्ञान गुन सागर 🙏 so its an ocean so impossible to drink all but if one kearns even a tiny bit the life is successful! Enlightenment is the ultimate truth.

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